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बदलता मौसम और खान-पान |The changing weather and our diet

Updated: Mar 4, 2021


प्रकृति ने ऋतु के हिसाब से हर फल और सब्जियां मौजूद हैं किन्तु हम स्वाद और कीमत को अहमियत देते हैं। अक्सर देखा गया है कि वैसे तो हम मंहगाई का अक्सर रोना रोते हैं किन्तु जब दिखावे की बारी आती है तो हम मौसम के बिल्कुल विपरीत मंहगी सब्जियां खाना अधिक पसंद करते हैं। यह सच है और किन्तु यही सच्चाई भी है। यदि हम बदलती ऋतुओं के हिसाब से अपना खान-पान रखें तो बीमारियों से काफी हद तक बच सकतेहैं। ऋतुओं के अनुसार भोजन करने से इम्‍यूनिटी पॉवर स्‍ट्रॉग होती है।


 

अक्सर देखा गया है कि जैसे ही मौसम में बदलता है कई प्रकार की बीमारियां फैलनी आरम्भ हो जाती हैं। सर्दियों के बाद गर्मियों का आरम्भ हो या गर्मियों के बाद सर्दियों का या फिर अन्य कोई भी मौसम हो। ऐसा क्यों होता है?


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इसके कई कारण हैं। ऐसा नहीं है कि पहले लोग बीमार नहीं होते थे। होते थे किन्तु उस समय चिकित्सा पद्धति इतनी विकसित नहीं थी] महामारियां फैलती थीं और इलाज के अभाव में छोटी सी बीमारी भी महामारी का रूप ले लेती थी। किन्तु अब समय बदल गया है। अधिकतर बीमारियों के इलाज संभव हैं। किन्तु फिर भी लोग बीमार हो जाते हैं क्यों?



क्योंकि हमारा खान-पान और जीवन शैली बिगडी हुई है। प्रकृति ने ऋतु के हिसाब से हर फल और सब्जियां मौजूद हैं किन्तु हम स्वाद और कीमत को अहमियत देते हैं। अक्सर देखा गया है कि वैसे तो हम मंहगाई का अक्सर रोना रोते हैं किन्तु जब दिखावे की बारी आती है तो हम मौसम के बिल्कुल विपरीत मंहगी सब्जियां खाना अधिक पसंद करते हैं। यह सच है और किन्तु यही सच्चाई भी है। यदि हम बदलती ऋतुओं के हिसाब से अपना खान-पान रखें तो बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं। ऋतुओं के अनुसार भोजन करने से इम्‍यूनिटी पॉवर स्‍ट्रॉग होती है। आइये जानते हैं क्या है ऋतुओं और हमारे खान-पान का संबंध। यह हमारे स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?



उचित आहार-विहार किस ऋतु में कैसा हो और क्यों हो इसका उत्तर जानने के लिए हमें ऋतुओं के गुण धर्म का ज्ञान हो जाए और हम उनके साथ तालमेल रखकर अनुकूल और उचित आहार-विहार कर सकें। ऐसा करना ‘ऋतु सात्म्य’ (Climate homogenization) कहलाता है जो कि स्वास्थ्य की रक्षा और वृद्धि के लिए नितान्त आवश्यक होता है।



सर्दियों में स्वाभाविक रूप से जठराग्नि तीव्र रहती है अतः पाचन शक्ति प्रबल रहती है। ऐसा इस कारण होता है कि ठंडी हवा और ठंडे वातावरण का प्रभाव हमारे शरीर की त्वचा पर बार-बार होते रहने से शरीर के अन्दर इकट्ठी होकर जठराग्नि को प्रबल करती है। उससे हमारा खाया-पिया भारी आहार भी ठीक से हजम हो जाता है और शरीर को बल प्राप्त होता है। इस ऋतु का सही और पूरा लाभ उठाने के लिए हमें पूरे शीतकाल में पौष्टिक, शक्ति वर्द्धक और गुणकारी पदार्थों का सेवन करना चाहिए। चना, शहद, मूंगफली, गाजर तथा अमरूद का प्रयोग कर सकते हैं।


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ग्रीष्म ऋतु ‘आदान काल’ की चरम सीमा होती है अर्थात इस काल में सूर्य पूरे तेज पर होता है और उसकी प्रचण्ड किरणें संसार के जलीय अंश शोषण करती है जिससे नदी, तालाब, झीलों का पानी सूख जाता है, वृक्षों से हरियाली नष्ट होती है और प्राणियों के शरीर का जलीयांश भी कम होता है जिससे प्यास का अनुभव होता है, इस ऋतु में दो बातों का ख्याल रखना सबसे ज्यादा रखना स्वास्थ्य रक्षा के लिए जरूरी होता है।


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शीत ऋतु में पथ्य (सेवन योग्य) पदार्थों का सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि दूसरी ऋतुओं में इन पदार्थों का सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि दूसरी ऋतुओं में इन पदार्थों का सेवन इतना लाभकारी नहीं होता, जितना इन ऋतुओं में होता है। इस ऋतु में पौष्टिक व बलवर्द्धक पदार्थ-उड़द, घी, चावल की खीर, मक्खन, मिश्री, रबड़ी, तिल, हरी शाक-सब्जी, अदरक, सोंठ, पीपर, मेथी, मुनक्का, अंजीर, गाजर एवं मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए। शहद इस ऋतु में अवश्य सेवन करना चाहिए।



ऋतु परिवर्तन को ध्यान में रखकर हमें बसन्त ऋतु में आहार में उचित परिवर्तन करना चाहिए। आयुर्वेद इस विषय में कहता है- बसन्त ऋतु में भारी, खट्टे, चिकने व मीठे पदार्थों का सेवन करना एवं दिन में सोना वर्जित किया है। इन दिनों में सुपाच्य जल्दी हजम होने वाला हल्का आहार लेना चाहिए भोजन में छिलके वाली मूंग दाल, हरी शाक सब्जियां, मौसमी फल, अदरक, शहद, रात को सोते समय दूध में जरा सी पिसी हल्दी मिलाकर सेवन करना चाहिए। चैत्र मास में प्रतिदिन प्रातःकाल नीम के नये पत्तों (कोपलों) 10-15 के लगभग संख्या में खूब चबा-चबाकर चूसते रहने चाहिए और महीन करके निकल जाना चाहिए। इन दिनों कफ से परेशान, खांसी, सर्दी-जुकाम, गले में खराश व दर्द होना, टान्सिल में दर्द होना, हल्का सा ज्वर, हाथ-पैरों में दर्द आदि परेशानियां होती हैं मौसम का संतुलन ठीक नहीं रहता। कभी सरदी तो कभी गरमी पड़ती है। इससे शरीर पर कुप्रभाव पड़ता है और मौसमी बीमारियां होती हैं।


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ग्रीष्म ऋतु ‘आदान काल’ की चरम सीमा होती है अर्थात इस काल में सूर्य पूरे तेज पर होता है और उसकी प्रचण्ड किरणें संसार के जलीय अंश शोषण करती है जिससे नदी, तालाब, झीलों का पानी सूख जाता है, वृक्षों से हरियाली नष्ट होती है और प्राणियों के शरीर का जलीयांश भी कम होता है जिससे प्यास का अनुभव होता है, इस ऋतु में दो बातों का ख्याल रखना सबसे ज्यादा रखना स्वास्थ्य रक्षा के लिए जरूरी होता है। पहली बात किसी भी कारण से शरीर में जलीयांश की कमी नहीं होने पाये और दूसरी बात, पेट खराब न हो पाये अपच और कब्ज की स्थिति न बनने पाये।



ग्रीष्म ऋतु में हमें ऐसा आहार करना चाहिए जिससे मीठे (मधुर रस), शीतल प्रकृति के, चिकनाई वाले (स्निग्ध), रसीले पदार्थों को शामिल किया जाना चाहिए। मौसमी फलों का यथाशक्ति सेवन करना हितकारी होगा। नमकीन, खटाईयुक्त, कटु रस वाले तथा गरम प्रकृति के पदार्थ, तले हुए और तेज मिर्च मसाले वाले पदार्थों का सेवन जितना कम करें उतना अच्छा है। भोजन में हल्के और सुपाच्य पदार्थों का ही सेवन करें। शाम के भोजन में दही, प्याज, केला, बेसन की चीजें, अरबी, बैंगन तले हुए पदार्थों का सेवन न करें। पानी अधिक से अधिक से अधिक पीयें। दोपहर में तरबूज, खरबूजा, ककड़ी आदि का सेवन करें। कच्चा नारियल और सौंफ मिश्री का सेवन करना हितकारी होगा।



IN ENGLISH:


Nature has every fruits and vegetables present according to the season, but we give importance to taste and price. It has often been seen that although we often cry of inflation, but when it comes to showing off, we like to eat expensive vegetables exactly opposite to the season. This is true, but it is also true. If we keep our food and drink according to changing seasons then we can avoid diseases to a great extent. According to seasons, eating food causes immunity power.


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It has often been seen that many types of diseases start spreading as the weather changes. It should be the beginning of summer after winter or after summer or any other season. Why does this happen?

There are many reasons for this. It is not that people did not get sick at first. There used to be, but the medical system was not so advanced at that time.] Pandemics spread and in the absence of treatment even a small disease took the form of an epidemic. But now the time has changed. Most diseases are curable. But still people get sick, why?


Because our food and lifestyle has deteriorated. Nature has every fruits and vegetables present according to the season, but we give importance to taste and price. It has often been seen that although we often cry of inflation, but when it comes to showing off, we like to eat expensive vegetables exactly opposite to the season. This is true, but it is also true. If we keep our food according to the changing seasons then we can avoid diseases to a great extent. According to seasons, eating food causes immunity power. Let us know what is the relationship between the seasons and our food. How does this affect our health?

In order to know the answer of what should be the proper dietary season and why, we should know the virtue religion of the seasons and we can keep a proper and proper diet in keeping with them. Doing this is called Climate homogenization, which is absolutely necessary to protect and enhance health.

In winter naturally gastritis is intense, so digestive power remains strong. This is due to the fact that due to the effect of cold air and cold environment on our body skin, it collects within the body and strengthens the gastrointestinal tract. Due to this, our heavy diet is also properly digested and the body gets strength. To get the full and full benefit of this season, we should consume nutritious, power enhancing and beneficial substances throughout the winter. You can use gram, honey, peanuts, carrots and guava.

Summer is the climax of the 'Input Period', that is, in this period, the sun is at full speed and its strong rays exploit the aquatic part of the world, which dries up the water of rivers, ponds, lakes, and greenery is destroyed by trees. And the body's body is also less jaundiced due to which it feels thirsty, taking care of two things during this season is most important for health protection.

Dietary (consumable) substances must be consumed in the winter season because these substances must be consumed in other seasons, because in other seasons, these substances are not as beneficial as these seasons. During this season nutritious and strong foods - urad, ghee, rice pudding, butter, sugar candy, rabri, sesame, green vegetables, ginger, dry ginger, pepper, fenugreek, dry grapes, figs, carrots and seasonal fruits should be consumed. Honey must be consumed in this season.

Keeping in mind the change of seasons, we should make appropriate changes in the diet in the spring. Ayurveda says in this topic - heavy, sour, smooth and sweet things are prohibited in the spring and gold is prohibited during the day. In these days, digestible light digestive food should be taken quickly, peeled moong dal, green vegetables, seasonal fruits, ginger, honey, mixed with a small amount of turmeric powder in milk at night should be consumed. In the morning of Chaitra month, in the morning every morning about 10-15 new neem leaves (copal) should be chewed and sucked, and it should be cured. These days there are troubles with phlegm, cough, cold-cold, sore throat and pain, tonsil pain, mild fever, pain in hands and feet etc. The balance of the weather is not right. Sometimes there is heat and sometimes it is hot. This affects the body and causes seasonal diseases.

Summer is the climax of the 'Input Period', that is, in this period, the sun is at full speed and its strong rays exploit the aquatic part of the world, which dries up the water of rivers, ponds, lakes, and greenery is destroyed by trees. And the body's body is also less jaundiced due to which it feels thirsty, taking care of two things during this season is most important for health protection. Firstly, due to any reason, the body should not be deficient in jaundice and secondly, the condition of indigestion and constipation should not be disturbed.

In the summer season, we should take such a diet which should include sweet (sweet juices), soft nature, lubricated (balsamic), juicy substances. It would be beneficial to consume seasonal fruits as much as possible. Salty, sour, bitter juices and hot nature substances, fried and spicy chilli spices are as good as possible. Eat light and digestible foods only. In the evening meal, curd, onion, banana, gram flour, Arabic, brinjal fried foods should not be taken. Drink more and more water. In the afternoon, eat watermelon, melon, cucumber etc. It would be beneficial to eat raw coconut and fennel sugar candy.

 
 
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