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महंगे राशि-रत्नों का विकल्प हैं जडी-बूटियां | Mahange raashi-ratnon ka vikalp hain jadee-bootiyaan

Updated: Jun 15, 2021


यह जीवन है, परेशानियां, जीवन का हिस्‍सा हैं। किन्‍तु कुछ परेशानियां ऐसी होती हैं, जो जीवन का रुख ही बदल देती हैं। हमारे शास्‍त्रों में राशियों आदि का वर्णन मिलता है, उन्‍हीं के अनुसार व्‍यक्ति का जीवन चलता है। ग्रह-नक्षत्र, जीवन को पूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। बुरे प्रभाव को रोकने के लिए राशि अनुसार रत्‍न धारण करने का विधान है। जिनसे ग्रहों के बुरे प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किन्‍तु राशि रत्‍न मंहगे हैं और आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। रत्नों के स्थान पर आप चाहें तो इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

व्‍यक्ति के जीवन में उतार-चढाव आते रहते हैं। यह जीवन है, परेशानियां, जीवन का हिस्‍सा हैं। किन्‍तु कुछ परेशानियां ऐसी होती हैं, जो जीवन का रुख ही बदल देती हैं। हमारे शास्‍त्रों में राशियों आदि का वर्णन मिलता है, उन्‍हीं के अनुसार व्‍यक्ति का जीवन चलता है। ग्रह-नक्षत्र, जीवन को पूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। बुरे प्रभाव को रोकने के लिए राशि अनुसार रत्‍न धारण करने का विधान है। जिनसे ग्रहों के बुरे प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किन्‍तु राशि रत्‍न रत्न मंहगे हैं और आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। रत्नों के स्थान पर आप चाहें तो इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।



रत्न

रत्न मूलतः तब धारण कराया जाता है जब कोई ग्रह जातक को अनुकूल प्रभाव दे रहा हो, यदि संबन्धित ग्रह की शक्ति कमजोर हो रही हो, अर्थात अनुकूल प्रभाव प्रदान करने के लिए कमजोर ग्रह का रत्न धारण करवाया जाना चाहिए।

दान

जब कोई ग्रह जातक पर प्रतिकूल प्रभाव प्रदान कर रहा हो तो संबन्धित ग्रह की वस्तुओं का दान किया जाना चाहिए। यदि जातक का ग्रह कमजोर न होकर नीच अर्थात निम्‍न स्थिति में हैं तो रत्‍न धारण नहीं करना चाहिए बल्कि ग्रह से संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहि‍ए और राशि ग्रह से संबंधित दान करना चाहिए।



मंत्र

मंत्र का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई ग्रह अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रकार का मिश्रित प्रभाव दे रहा हो। मंत्रों की शक्ति से अनुकूल प्रभाव का असर बढ़ जाता है और प्रतिकूल प्रभाव नष्ट हो जाता है।

रत्न धारण करने की भी एक निश्चित विधि होती है।


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ग्रहों के अनुसार रत्न और उन्हें धारण करने के नियमः

सूर्य

सिंह राशि का स्‍वामी सूर्य है। अगर सूर्य पीडि़त या रुग्ण होकर आंखों में विकार उत्पन्न करता है, तो सूर्य को बलवान करना जरूरी होता है। इसलिए तांबा या सोने की अंगूठी में माणिक रत्न धारण करें। सूर्य के लिए 3 रत्ती का माणिक रत्‍न, अनामिका उंगली में स्वर्ण धातु में जड़वाकर रविवार के दिन अथवा पुष्य नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

जो लोग माणिक्य नहीं खरीद सकते, वे बेल (बिल्व) की जड़ धारण कर अनुकूल लाभ प्राप्त कर सकते हैं।



चन्द्र

कर्क राशि का स्‍वामी चंद्रमा है। व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति खराब है तो व्यक्ति को बाल्यावस्था में मृत्यु तुल्य कष्ट होता है। ऐसे में चांदी का चंद्रमा बनाकर सफेद धागों में बच्चे के गले में या बाजू में बांधें। चंद्रमा को आंखों का कारण भी माना गया है। यानी यह आंखों को भी प्रभावित करता है। चन्द्र के लिए

7 रत्ती का मोती, कनिष्ठा उंगली में चांदी की धातु में जड़वाकर शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को अथवा रोहिणी नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

मोती के बदले वनस्पति शतावरी की जड़ को धारण करें। इससे अनुकूल लाभ मिलता है।


मंगल

मेष राशि और वृश्चिक राशि का स्‍वामी मंगल है। मंगल के लिए 5 रत्ती का मूँगा अनामिका उंगली में स्वर्ण या ताँबे की धातु में मंगलवार के दिन और सूर्योदय के समय धारण करना चाहिए।

जो जातक मूंगा नहीं खरीद सकते, वे अनंतमूल को धारण कर अनेक कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।


बुध

मिथुन राशि और कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह है। इस राशि के व्यक्तियों के लिए पन्ना रत्न सही रहता है। बुध के लिए 5 रत्ती का पन्ना कनिष्ठा उंगली में स्वर्ण या कांसे की धातु में बुधवार के दिन अथवा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में धारण करें।

पन्ना के स्थान पर आप विधारा की जड़ धारण कर सकते हैं। इससे वही लाभ प्राप्त होगा, जो पन्ना धारण करने से प्राप्त होता है।


गुरु

मीन और धनु राशि का स्वामी गुरु ग्रह है। गुरु के लिए पुखराज सर्वश्रेष्ठ रत्न है। गुरु के लिए 5 रत्ती का पुखराज, तर्जनी उंगली में स्वर्ण धातु में जड़वाकर गुरुवार के दिन अथवा गुरुपुष्य नक्षत्र में धारण कराएं। लेकिन पुखराज सबके लिए खरीदना आसान नहीं है।


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जो व्यक्ति पुखराज नहीं खरीद सकते हैं, वे कच्ची हल्दी की गांठ धारण करें। इससे उनकी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।


शुक्र

वृष राशि और तुला राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है। इसका रत्न हीरा है। शुक्र के लिए 2 कैरेट का हीरा मध्‍यमा उंगली में सोने या चांदी की धातु में जड़वाकर शुक्रवार के दिन अथवा मृगशिरा नक्षत्र में धारण करना चाहिए।


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हीरा मंहगा रत्न है और हर किसी के वश की बात इसे खरीदना नहीं है। हीरा के स्थान पर वृषला मूल को धारण कर सकते हैं।



शनि

कुंभ और मकर राशि का स्वामी शनि ग्रह है। इसका रत्न नीलम या लोहा है। शनि के लिए 3 रत्ती का नीलम मध्यमा उंगली में पंचधातु या लोहे की धातु में शनिवार के दिन अथवा श्रवण नक्षत्र में धारण करना चाहिए।


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नीलम का प्रतिनिधित्व करनी वाली जड़ी, बिछुआ की जड़ है। इसको धारण करने से सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं।


इन जड़ी-बूटियों के प्रति विश्वास जरूरी है तभी लाभ हो सकता है।




 
 
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