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शिशु की उचित देखभाल कैसे करें? | How to take proper care of your baby?

Updated: Mar 13, 2021


हर दम्‍पत्त‍ि, माता-पिता बनना चाहते हैं, लेकिन माता-पिता बनते ही वह कई प्रकार की परेशानियों से भी घिर जाते हैं। बच्‍चे की उचित देखभाल कर पाना नये माता-पिता के लिए बहुत ही मुश्किल है। कई सवाल हैं जो न्‍यू मदर को परेशान करते हैं। शिशु की अच्‍छी सेहत और समुचित विकास के लिए कुछ बातों का जानना बेहद आवश्‍यक है। इस लेख में हम इन्‍हीं विषयों के बारे में पर्याप्‍त जानकारी देने का प्रयास करेंगे।


 


शिशु की देखभाल कैसे करें

मां बनना, किसी भी औरत के लिए एक सुखद अहसास है। मां बने बिना एक नारी अधूरी ही है। भगवान से एक मां को स्‍वयं से भी ऊपर दर्जा दिया है। यह सही है कि मां बनना, एक सुखद अहसास है, किन्‍तु मां बनने के साथ ही एक मां की बच्‍चे के प्रति जिम्‍मेदारी भी बढ जाती है। हर दम्‍पत्त‍ि, माता-पिता बनना चाहते हैं, लेकिन माता-पिता बनते ही वह कई प्रकार की परेशानियों से भी घिर जाते हैं। बच्‍चे की उचित देखभाल कर पाना नये माता-पिता के लिए बहुत ही मुश्किल है। कई सवाल हैं जो न्‍यू मदर को परेशान करते हैं। शिशु की अच्‍छी सेहत और समुचित विकास के लिए कुछ बातों का जानना बेहद आवश्‍यक है। इस लेख में हम इन्‍हीं विषयों के बारे में पर्याप्‍त जानकारी देने का प्रयास करेंगे।



मां का दूध है संपूर्ण आहार

मां का दूध बच्‍चे के लिए आवश्‍यक है। मां के दूध में वे सभी पोषक तत्‍व विद्यमान होते हैं जो बच्‍चे के विकास में सहायक हैं। इसके अलावा मां का दूध शिशु को अनेक प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है। इसलिए मां को शिशु को अपना ही दूध पिलाना चाहिए। प्रसव के बाद मां का गाढा पीला दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। मां को इस बात का भी ध्‍यान रखना चाहिए कि बच्‍चा जब भी रोये तो केवल उसे अपना दूध पिलाकर ही चुप कराने का प्रयास न करें, बल्कि बच्‍चे के रोने के कारणों को जानने का प्रयास करे। शिशु भूख के अलावा अन्‍य कारणों से भी रो सकता है। उसके पेट में दर्द हो सकता है। उसके कपडे गीले हो सकते हैं आदि। इसलिए दूध पिलाने से पहले शिशु के रोने के कारणों का पता लगायें।


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शिशु को दूध पिलाने का समय तय करें। यदि किन्‍हीं कारणों से मां शिशु को अपना दूध नहीं पिला पा रही हो तो बच्‍चे को गाय का दूध पिलाया जा सकता है। बच्‍चे को बोतल के अलावा कटोरी चम्‍मच से दूध पिलाने का प्रयास करें। यदि आप शिशु को बोतल से दूध पिला रही हैं तो बोतल में दूध डालने से पहले बोतल को गर्म पानी से अच्‍छे से धो लें। गंदी बोतल से शिशु को इंन्‍फेक्‍शन होने का खतरा हो सकता है।



शिशु की साफ-सफाई का खास ख्‍याल रखें।

शिशुओं के नाखून तेजी से बढते हैं और उनमें मैल भी जमा हो जाता है इसलिए शिशु और उसके नाखूनों की सफाई का विशेष ध्‍यान रखें। जब शिशु गहरी नींद में हो सावधानीपूर्वक उसके नाखून काट दें। शिशु के शरीर को तौलिया से अच्‍छे से पोंछकर बेबी पाउडर लगायें। बच्‍चे के साबुन, तौलिया व अन्‍य सामान अलग रखें।


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शिशु को गुनगुने पानी से ही स्‍नान करायें। पानी के प्रयोग से पहले, पानी स्‍वयं चैक करें कि पानी अधिक गर्म तो नहीं है। बच्‍चे को नहलाने वाले के हाथों के नाखून बढे हुए नहीं होने चाहिए। नहलाने से पहले हाथों से चूडी, कडा, अंगूठी आदि चीजों को उतार दें। यह चीजें शिशु को चोट पहुंचा सकती हैं। बच्‍चोेंं के प्रयोग किये जाने वाले प्रोडक्‍ट्स जैसे साबुन, तेल इत्‍यादि अच्‍छी क्‍वालिटी का और हर्बल प्रोडक्‍ट्स ही प्रयोग करें। केमिकल बेस प्रोडक्‍ट्स का प्रयोग न करें।


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शिशु के कपडे सूती, कोमल और पहनाने में आसान होने चाहिए। अधिक मंहगे और टाइट कपडे शिशु का न पहनायें। शिशु के कपडों के बटन, हुक की जगह लूप या फीते होने चाहिए। शिशु के सारे कपडे अलग-अलग बक्‍सों में रखें, कपडे ढूंढते समय परेशानी न हो।

कोई भी दवा, शिशु को डॉक्‍टर की सलाह से ही दें।



शिशु को हमेशा बिब पहनाकर रखें

बच्‍चे को हमेशा बिब पहनाकर रखें। जब बच्‍चा मुंह से दूध निकालेगा तो बिब ही गंदा होगा, उसके सभी कपडे गंदे नहीं होंगे और बार-बार कपडे भी नहीं बदलने पडेंगे। यदि शिशु के कपडे गंदे हो जायें तो उन्‍हें तुरंत बदल दें।


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बच्‍चे की मालिश नियमित रूप से करें

शिशु को नहलाने से पहले प्रतिदिन शिशु की मालिश करें। मालिश से बच्‍चे की मांसपेशि‍यां मजबूत होती हैं। रात्रि में सोने से पहले भी शिशु की मालिश करें। शिशु की सारे दिन की थकान दूर होगी और शिशु पूरी रात गहरी नींद में सोयेगा। बच्‍चेे की मालिश के लिए अच्‍छे तेल का ही प्रयोग करें या फिर नारियल तेेल, जैतूल का तेल, सरसोंका तेल या फिर देशी घी का प्रयोग करें। मालिश के लिए हर्बल प्रोडक्‍ट्स ही प्रयोग करें। केमिकल बेस प्रोडक्‍ट्स का प्रयोग न करें।



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शिशु को अच्‍छी नींद के लिए निम्‍न बातों का ख्‍याल रखें

बच्‍चो का बिस्‍तर तेज रोशनी की ओर न लगायें। तेज प्रकाश उसकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। शिशु को कभी भी मुंह ढककर न सुलायें। पेट के बल या सीधा भी शिशु का न सुलायें। शिशु को समय-समय पर करवट बदल-बदल कर सुलायें। बच्‍चे का बिस्‍तर मुलायम व साफ होना चाहिए। सोते हुए शिशु को न जगायें।





 
 
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