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हार्ट अटैक: कारण, लक्षण और बचाव | Heart attack: causes, symptoms and prevention

Updated: Sep 16, 2021


हृदय शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। मानव शरीर में यह छाती के मध्य में थोडा सा बाईं ओर होता है। यह दिन में एक लाख बार और एक मिनट में 60 से 90 बार धडकता है। यह हर धडकन के साथ शरीर रक्त को धकेलता है। हृदय को पोषण, एवं ऑक्सीजन, रक्त द्वारा ही मिलता है। हृदय में चार वॉल्व, दो बाईं ओर एवं दो दाईं ओर होते हैं जो रक्त के बहाव को निर्देशित करने का कार्य करते हैं। दिल की धडकन हैं तो हम हैं नहीं तो कुछ भी नहीं। इसलिए दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन लें और तनाव रहित जीवन को अपनायें।

 

कुछ समय पहले तक हृदय रोग के बारे में कोई जानता तक नहीं था। ऐसा नहीं है कि पहले किसी को यह रोग होता नहीं था बल्कि लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। मगर आज यह बीमारी विकराल रूप ले चुकी है। पहले हार्ट अटैक की बीमारी बुजुर्ग व्यक्तियों को ही होती थी, किन्तु अब इसकी गिरफ़्त में युवा वर्ग भी आ गया है।

प्रतिस्पर्दा के दौर में, हर वर्ग के लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। लोग आगे बढ़ने की चाह में दिन रात मेहनत कर रहे हैं और वहीं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं। लोग न तो अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं और न ही खान-पान का। जो भी इंस्टेंट मिल जाता है, खा लिया जाता है। वर्तमान समय में बहुत ही तेजी से लोगों को दिल की बीमारी हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि जिनकी उम्र 64 वर्ष से ऊपर है, उनमें से 50% लोगों को दिल का दौड़ा पड़ता हेै।


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हमारा हृदय भिंची हुई मुट्ठी के आकार का होता है। यह फेफड़ों तथा थौरेक्स के मध्य स्थित होता है। इसकी दीवार की तीन परते हैं- बाहरी, भीतरी, तथा मध्यवर्ती परत। वाल्व्स की मदद से हृदय निरंतर शरीर के सारे भागों में रक्त को प्रवाहित करता है। हृदय का प्रत्येक लययुक्त संकुचन, एक छोटी शॉक वैव पैदा करता है। जिसे हम नब्ज के रूप में जानते हैं। नब्ज हमारे हृदय की, न रुकने वाली गतिविधि का संकेत करती है।


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एक साधारण मनुष्य में औसत हार्ट बीट की दर 70 से 72 बीट्स प्रति मिनट है। प्रत्येक हार्ट बीट दो तरह की ध्वनियां पैदा करती हैं। यह हैं ‘लुब्ब’ तथा ‘डुप्प’ प्रति मिनट हृदय से लगभग 5 लीटर रक्त (एक स्वस्थ व्यक्ति) निकल कर शरीर में जाता है। फिर वापिस हृदय में आता है। यह क्रिया मानव के जीवन-पर्यन्त चलती रहती है।

हमारे हृदय में दो पम्प होते हैं। दाईं ओर वाले पम्प, फेफड़ों के माध्यम से रक्त प्रवाहित करते हैं तथा उसे वापिस हृदय तक लाते हैं। इसको पल्मोनरी सर्कुलशन कहते है। जिसमें फेफड़ों के माध्यम से ऑक्सीजन भरपूर रक्त शरीर में भेजा जाता है।



हृदय रोग एक ऐसी बीमारी है, जो किसी एक कारण से नहीं होती। इस रोग अनेक कारण हैं। कुछ कारण निम्न प्रकार हैं-

  • रक्त में वसा की अधिकता

  • अधिक मोटापा

  • डायबिटीज

  • एक्सरसाईज की कमी

  • संतुलित आहार की कमी

  • उच्च रक्त चाप

  • शोक, चिंता, दुःख

  • तंबाकू समेत नशीले पदार्थों का सेवन आदि।

लोगों में हार्ट अटैक का खौफ इस तरह हावी है कि सीने में जरा सा खिंचााव, दर्द या जलन की शिकायत होते ही हम निकट के डॉक्टर के पास दौड़ पड़ते हैं। डॉक्टर भी आनन-फानन में कई टेस्ट करवा देते हैं किन्तु नतीजा कुछ नहीं निकलता। जबकि सच्चाई यह है कि सीने में दर्द के अन्य कारण भी हो सकते हैं-


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हमारे देश में सीने के दर्द का सबसे बड़ा कारण सीने की अंदरूनी दीवारों की सूजन है। अक्सर होता है कि जब फेफड़े की ऊपरी सतह पर स्थित झिल्ली में सूजन आ जाती है, तब सीने की अंदरूनी दीवार में स्थित सूजी हुई सतह से यह सांस लेते समय रगड़ खाती है, जिससे सीने में असहनीय दर्द होता है।


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  • कभी-कभी सीने में पस जमा होने से भी सीने में दर्द हो सकता है। यह निमोनिया या फेफड़े के अन्य इन्फेक्शन भी हो सकते हैं।

  • सीने में दर्द का एक कारण व्यायाम न करना भी हैं। यहां तक कि लोग पैदल चलना भी भूल गए हैं। व्यायाम के अभाव में रीढ़ की हड्डियों के जोड़ सख्त हो जाते हैं।

  • परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी के साथ, कंधे और सीने के भागों में जाने वाली नसों पर दवाब पड़ने लगता है। इस कारण सीने और बाजू में दर्द होने लगता है।

  • पसलियों की कमजोरी के कारण इन दिनों अक्सर युवक-युवतियां सीने में दर्द की शिकायत करते हैं। मेडिकल भाषा में इसको कॉस्टो कॉन्डूइटिस (पसलियों की सूजन) कहते हैं। यह बीमारी नियमित रूप से दूध न पीने के कारण होती है।

  • ठंडे खाद्य पदाथों के सेवन से भी सीने में दर्द हो सकता है।

  • गले और खाने की नली में अंदरूनी सूजन के कारण भी हृदय में दर्द हो सकता है।

अतः यह जान लेना आवश्यक है कि सीने में दर्द से हमेशा हार्ट अटैक नहीं होता।

दिल के दर्द के लक्षणः

  • सीने के बायें हिस्से में दिल की जगह पर दर्द होना।

  • खाना खाने के फौरन बाद दर्द होना।

  • दिल जोर-जोर से धड़कता है। चेहरा पीला पड़ जाता है। व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है।

  • रोगी को पसीना बहुत आता है।

  • दिल का दर्द हमेशा सीने की हड्डियों के बीच से शुरू होकर गर्दन के बायें कंधे या दोनों कंधों की ओर बढ़ता है। इस दर्द की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि मरीज की मौत भी हो सकती है।

  • दिल का दर्द, दिल की बीमारी की पहली पहचान है।

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दिल में दर्द या दिल का दौरा के कारण-

उच्च रक्त चापः

यदि रक्तचाप 140/90 से अधिक हो, तो उच्च रक्तचाप कहलाता है। जितना अधिक उच्च रक्तचाप होगा दिल के दौरे का खतरा उतना ही अधिक होगा।

उच्च कॉलेस्ट्रॉलः कॉलेस्ट्राल एक तरह का वसा है। यह रक्त के प्रोटीन के साथ मिला होता है। इसको लाइपो प्रोटीन भी कहा जाता है। कॉलेस्ट्रोल और दिल का दौरे का बहुत ही करीबी संबंध है। जिन व्यक्तियों के रक्तचाप में कॉलेस्ट्राल की मात्रा 200 मि. ग्रा. प्रतिशत से अधिक होती है, जिनके खून में यह मात्रा 180 मि. ग्रा. प्रतिशत से कम होती है।

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स्मोकिंगः धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में दिल के दौरे समेत अनेक रोग होते हैं। जैसे कैंसर आदि।

मधुमेहः मधुमेह रोगियों क रक्त में कॉलेस्ट्राल की मात्रा अधिक होती है। अतः ऐसे रोगी दिल के दौरे के अधिक शिकार होते हैं। मधुमेह के रोगियों को अग्नि मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। इस मुद्रा का वर्णन अपने अन्य ब्लाग 'मुद्रा चिकित्सा विज्ञान' में किया है।


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व्यायाम का अभाव

यदि आप दिन भर कुछ शारीरिक परिश्रम नहीं करते, पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहते हैं तो शरीर में रक्त संचालन भली-भांति कैसे होगा। ऐसे व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ सकता है।

मोटापाः मोटे व्यक्तियों को दिल के दौरे का खतरा अधिक होता है।

तनाव: तनाव, मानसिक, उलझन, सदमा, डिप्रेशन, आदि दिल के दौरे के संभावनओं को बढ़ाते हैं।

गुस्साः जिन व्यक्तियों को गुस्सा अधिक आता है, उन्हें दिल के दौरे का सामना अधिक करना पड़ता है।

आनुवांशिकः अगर परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो, तो दिल के दौरे के प्रति हमेशा सजग रहें।

उम्रः अधिकांश मामलों में 50 से ज्यादा उम्र के व्यक्तियों को दिल के दौरे पड़ते हैं। हालांकि दिल के दौरे का, उम्र से कुछ लेना-देना नहीं होता है। क्योंकि एक कम उम्र का स्मोकर भी दिल के दौरे का शिकार हो सकता है।

हृदय रोगियों के लिए बरती जाने वाली सावधानियां:

हमारे शरीर का सबसे आवश्यक अंग दिल है। दिल की धड़कन हैं तो हम हैं। हृदय रोगियों को अपना हृदय का ध्यान रखना चाहिए। आप स्वयं का और स्वयं के हृदय का निम्न प्रकार से ध्यान रख सकते हैं-

  • तंबाकू या तंबाकू के सेवन से बचें।

  • हृदय रोगियों को हर हाल में मोटापे से बचना चाहिए। इसके लिए व्यायाम करें, संतुलित भोजन लें।

  • हृदय रोगियों को नमक का सेवन कम करना चाहिए।

  • हृदय रोगी अधिक परिश्रम करने से बचें।

  • हृदय रोगी अधिक क्रोध, आवेग, तनाव व चिंता से बचें।


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  • हृदय रोगी अपनी दिनचर्या नियमित करें। पर्याप्त नींद लें। रात को जल्दी सोयें और सुबह सूर्य उदय से पहले उठें।

  • हृदय रोगी मार्निंग वॉक पर अवश्य जायें।

  • नियमित योगासन, प्राणायाम करें।

  • हृदय रोगी रक्तचाप की नियमित जांच कराते रहें।

  • रक्तचाप बढ़ जाने पर नारियल पानी, सब्जियों का सूप, पर्याप्त पानी अवश्य पीयें।

  • हृदय रोगियों को ध्यान मुद्रा और आकाश मुद्रा का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए। प्राणायाम करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। शवासन करें। इन मुद्राओं का वर्णन अपने अन्य ब्लाग 'मुद्रा चिकित्सा विज्ञान' में किया है।

  • हृदय रोगी मनोरंजन में समय बिताएं। आशावादी बनें।

  • हंसना-मुस्कराना हृदय का सर्वोतम व्यायाम है। इससे टी-सेल्स की संख्या से बढ़ोतरी होती है। अतः हृदय रोगियों को हंसते मुस्कराते रहना चाहिए।

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दिल में यदि दर्द हो तो क्या करना चाहिए?

  • दिल में यदि दर्द हो तो काम रोक कर आराम करें।

  • दिल में दर्द यदि भोजन करते समय हो तो भोजन कम करें या उसी समय भोजन करना बंद कर दें।

  • दिल का दर्द यदि बढ़ता ही जा रहा है तो सॉरब्रिटेट या एंजीसेड या आइसोरडिल की गोली जीभ के नीचे रखकर चूसें। और तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचे।

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हृदय रोगी और आहार

  • हृदय रोगियों को भोजन पेट भरकर नहीं खाना चाहिए। भोजन मेें हरी सब्जियां, मौसमी फल आदि को शामिल करें।

  • दिल के मरीज प्रतिदिन 4-5 अखरोट खायें।

  • दिल के मरीज नियमित रूप से गैस नाशक चटनी खायें।

  • हृदय रोगियों को गेहूं व चने के आटे की रोटियां, चोकर युक्त आटे का सेवन करें।

  • हृदय के रोगी घी, तेल, चॉकलेट, मलाई, मक्खन, आइसक्रीम आदि चीजें कम खायें।

दिल के रक्षक भोज्य पदार्थ:

चेरी: यह माना जाता है कि चेरी में विद्यमान लाल रंग शरीर में यूरिक एसिड को कम करने में मदद करता है। खून में बढा हुआ यूरिक एसिड हार्ट अटैक पैदा कर सकता है। मुट्ठी भर चेरी का प्रतिदिन सेवल दिल के रोगों से बचाता है।


कॉफी: कॉफी भी दिल के लिए काफी अच्छी है। यदि दिन में 2 से 4 बार ब्लैक कॉफी या ब्लैक टी नियमित रूप से पी जाये तो दिल के रोगों से काफी हद तक बचा जा सकता है। किन्तु इस बात का अवश्य ख्याल रखें कि चाय या कॉफी कभी भी खाली पेट न पीयें।

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टोफू: यदि दिल के रोगों से बचना है तो पनीर की जगह टोफू का सेवन करें। टोफू में विद्यामन मिनरल्स, फाइबर और पॉलीसैच्युरेटेड फैट्स होते हैं जिससे धमनियां खराब वसा के कारण ब्लॉक नहीं हो पातीं। टोफू को सूप में डालकर बनायें। इससे आपको उत्तम क्वालिटी का प्रोटीन प्राप्त होगा।

अखरोट: प्रतिदिन मुट्ठी भर अखरोट का सेवन करने से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं तथा धमनियों में सूजन आने का खतरा कम हो जाता है। अखरोट में ओमेगा-3 नामक मोनोसैच्युरेटेड फैट और रेशा पाया जाता है।

ओट्स: सुबह-सुबह गरम दूध के साथ ओटमील लेने से कई घंटों तक भूख नहीं लगती, जिससे शुगर लेवल मेंटेन रहता है। ओट्स में फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है जो शुगर में भोजन में शामिल करना बेहद आवश्यक है।

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संतरा: संतरे में भरपूर मात्रा में पोटेशियम होता है। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखता है तथा इसमें फाइबर भी भरपूर मात्रा होता है।

बादाम: दिल के रोगों से बचने के लिए नियमित रूप से प्रतिदिन एक मुट्ठी बादाम अवश्य खाने चाहिए। बादाम में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो दिल और मधुमेह होने से बचाता है।

ऑलिव ऑयल: ऑलिव ऑयल या जैतून का तेल एंटीऑक्सीडेंट तथा स्वास्थ्य वर्द्धक मोनोसैच्युरेडेट फैट होता है। इस तेल के सेवन से खून की धमनियों से अच्छी प्रकार से खून पास हो पाता है।


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